कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा, अजीत डोभाल ने संपूर्ण जीवन राष्ट्र की सुरक्षा और एकता के लिए समर्पित किया

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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा, अजीत डोभाल ने संपूर्ण जीवन राष्ट्र की सुरक्षा और एकता के लिए समर्पित किया

देहरादून 12 अक्तूबर। भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर बार बार की गई अमर्यादित टिप्पणी को देवभूमि के शौर्य का अपमान बताया है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर कांग्रेसी युवराज की ये टिप्पणियां देश के दुश्मनों जैसी हैं। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को भी चुनौती दी कि सबके स्वाभिमान, देशभक्ति और कुछ की थोड़ी उत्तराखंडियत शेष हो तो वे राहुल की खुलकर आलोचना करें। वहीं चेताया कि ऐसा करके यदि, राहुल बार बार देवभूमि द्वारा चुनाव में नकारे जाने का बदला ले रहे हैं तो इसका जवाब जनता उनके उम्मीदवारों का सूपड़ा साफ कर देगी।

प्रदेश मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, राहुल द्वारा बार बार अजीत डोभाल पर टिप्पणी को उत्तराखंड के स्वाभिमान पर प्रहार बताया। साथ ही कहा कि डोभाल उत्तराखंड के ऐसे वीर सपूत हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की सुरक्षा और एकता के लिए समर्पित कर दिया है। उन पर राहुल गांधी द्वारा कसने गए तंज और अमर्यादित टिप्पणियां देवभूमि उत्तराखंड की जन-भावनाओं का घोर अनादर हैं। राहुल गांधी की उत्तराखंड के वीर सपूत अजीत डोभाल जी पर लगातार अमर्यादित टिप्पणी सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि उत्तराखंड के गौरव और स्वाभिमान पर हमला है। कांग्रेस को यह भली-भांति समझना चाहिए कि उन पर दिया गया अपमानजनक बयान सीधे तौर पर देवभूमि उत्तराखंड की जन-भावनाओं और स्वाभिमान पर गहरा आघात है। वहीं बताया कि श्री डोभाल की पहचान किसी राजनीतिक पद से नहीं, बल्कि उनकी दशकों लंबी राष्ट्रसेवा से बनी है।

उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा एवं एकता के लिए अपना जीवन खपा देने वाले व्यक्ति पर राहुल गांधी की घटिया टिप्पणी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या कांग्रेस की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लोगों के सम्मान की जगह नहीं है? राहुल को जवाब देना चाहिए कि आखिर श्री डोभाल से इतनी राजनीतिक बेचैनी क्यों है? देश की सुरक्षा व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर काम करने वाले व्यक्ति पर सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन उनके खिलाफ इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना कांग्रेस की गिरती राजनीतिक मर्यादा और संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य नेताओं से स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती दी कि देवभूमि के अपमान पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष क्या है? यदि वे इससे सहमत हैं, तो क्या वे उत्तराखंड के गौरवशाली सपूत के इस अपमान का समर्थन करते हैं? यदि नहीं तो क्या वे सार्वजनिक रूप से राहुल एवं कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करेंगे? और क्या उत्तराखंडियत की बात करने वालों का स्वाभिमान समाप्त हो गया है?

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के नेताओं की भाषा देश के वीरों को लेकर विवादों में आई है। वर्ष 2017 में कांग्रेस के एक बड़े नेता ने तत्कालीन सेना प्रमुख और उत्तराखंड के वीर सपूत जनरल बिपिन रावत जी के लिए “सड़क का गुंडा” जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत जी और अजीत डोभाल-दोनों उत्तराखंड की धरती के गौरव हैं। एक ने भारतीय सेना का नेतृत्व किया और दूसरे ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे महान सपूतों में से एक के लिए पूर्व में “सड़क का गुंडा” जैसे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना तथा दूसरे पर राहुल गांधी द्वारा तंज कसना, कांग्रेस की उत्तराखंड विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को शर्म आए न आए, लेकिन प्रदेश की जनता इस निरंतर अपमान को किस रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

वहीं याद दिलाया कि कांग्रेस का राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी पुराना रिकॉर्ड सवालों के घेरे में रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से कार्रवाई और उसके प्रमाण को लेकर सवाल उठे। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भी कांग्रेस नेताओं की ओर से कार्रवाई के प्रमाण और परिणाम को लेकर सवाल सामने आए। राहुल गांधी ने वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के संदर्भ में प्रधानमंत्री पर जवानों के बलिदान की “दलाली” करने जैसी घटिया टिप्पणी भी की थी। कांग्रेस की इस संकीर्ण सोच का करारा जवाब देश की जनता ने उन्हें कैसे दिया था वो पूरा देश अच्छी तरह जानता है। इसी तरह गलवान घाटी की घटना,
ऑपरेशन सिंदूर के समय भी यही घटिया राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। कांग्रेस को यह साफ करना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में भारत के साथ खड़े होने के बजाय उसके नेता पाकिस्तान के सुर में सुर क्यों मिलाते हैं?

जोशी ने इस संदर्भ में भाजपा का रुख स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उत्तराखंड के वीर सपूत डोभाल जैसे अनुभवी सुरक्षा विशेषज्ञ को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की जिम्मेदारी देकर उत्तराखंड के सैन्य इतिहास को महत्व दिया गया है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि एक ओर भाजपा सरकार है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और उत्तराखंड के सपूत की भूमिका को महत्व देती है, दूसरी ओर कांग्रेस के शीर्ष नेता उन्हीं पर घटिया राजनीतिक टिप्पणी करते हैं।

वहीं उन्होंने तंज कसा कि स्थानीय कांग्रेस नेताओं में साहस नहीं, वे राहुल गांधी से इस अपमान पर सवाल कर सकें? इसलिए भाजपा उनसे सवाल करती कि आखिर उसे पहाड़ के इस बेटे से इतनी परेशानी क्यों है? राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान की एक मर्यादा होनी चाहिए। क्यों कांग्रेस के नेता मां भारती के सच्चे सपूतों को राजनीतिक निशाना बना रहे हैं? उत्तराखंड की जनता भी कांग्रेस से पूछना चाहती है कि देश के लिए अपना पूरा जीवन लगाने वाले पहाड़ के इन सपूतों से आखिर कांग्रेस को इतनी नफरत क्यों है? यदि ये सब राहुल गांधी उत्तराखंड में बार बार चुनाव में नकारे जाने के बदले में कर रहे हैं तो उन्हें गांठ बांध कर रख लेनी चाहिए कि इस बार राज्य में उनके टिकटार्थियों का से सुपडा साफ होने वाला है।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री श्रीमती दीप्ति रावत, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर सिंह चौहान, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल , कर्नल रघुवीर भंडारी , शमशेर सिंह बिष्ट, दिनेश प्रधान, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी श्री राजेंद्र नेगी भी मौजूद रहे।

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